खराहल घाटी के जंगलों में कुल्हाड़ी

काईस (कुल्लू)। सर्दी की दस्तक के साथ ही खराहल घाटी के जंगलों में कुल्हाड़ी चलनी शुरू हो गई है। जाड़े से निपटने के लिए लकड़ियों को इकट्ठा किया जा रहा है। इसके चलते जंगलों से देवदार, काईल, रई, मोहरू, वान और कोईश आदि प्रजाति के हरे-भरे पेड़ों की टहनियां काट कर हरे पेड़ों का सफाया किया जा रहा है। इससे घाटी में सैकड़ों पेड़ सूखने लगे हैं। इस पर पर्यावरण प्रेमी भी चिंतित हो उठे हैं। ऐसे में वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। वन माफिया बेखौफ घाटी की वन संपदा को नष्ट करने में जुटा हुआ है। क्षेत्रवासी लाभ सिंह, भोला राम, राणू, विनोद, संजीव, चमन लाल, हर्ष दिनेश और हिमाचल पर्यावरण वन्य प्राणी सुरक्षा समिति अध्यक्ष एवं राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता किशन लाल ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि अवैध कटान पर रोक लगाने के लिए विभाग आखिर कब तक हरकत में आएगा। उन्होंने कहा कि इंधन के रूप में हो रहे वनों के कटान से हरे-भरे जंगलाें को भारी नुकसान पहुंच रहा है। उधर, अरण्यपाल जीसी होजर ने बताया कि फील्ड स्टाफ को कड़े निर्देश दिए गए हैं। लापरवाही किसी भी सूरत पर बर्दाश्त नहीं होगी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पेड़ों की टहनियां काटता हुआ पकड़ा जाएगा, उसे वन अधिनियम 1927 के तहत कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

Related posts